सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

क़ौमी एकता

वो तवायफ़
कई मर्दों को पहचानती है
शायद इसलिए
दुनिया को ज़्यादा जानती है
- उसके कमरे में
हर मज़हब के भगवान की
एक-एक तस्वीर लटकी है
ये तस्वीरें
लीडरों की तक़्रीरों की तरह नुमाइशी नहीं
उसका दरवाज़ा
रात गए तक
हिन्दू
मुस्लिम
सिख
ईसाई
हर ज़ात के आदमी के लिए खुला रहता है
ख़ुदा जाने
उसके कमरे की सी कुशादगी
मस्जिद
और
मन्दिरों के आँगन में कब पैदा होगी!

-निदा फ़ाज़ली

मायने:- कुशादगी – उदारता, फैलाव

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